Kapil Dev Agrawal - (11 September 2025)भाषाएं सब ही अच्छी होती हैं , लेकिन आज बहुत कम लोगों को पता है कि हिंदी भाषा अन्य भाषाओं की तुलना ने एक बहुत सशक्त भाषा है । जरा एक नजर डालिए । हिंदी भाषा का शब्द कोष 85 हजार शब्दों का संग्रह है , जब कि मूल इंग्लिश ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में कुल 18000 शब्द ही हैं । वही गुजराती में 27000 , मराठी में 24,000 , और इसी तरह अन्य भाषाओं में भी शब्दों की श्रृंखला हिंदी भाषा से बहुत कम है । किसी भाषा में जितना विस्तारित शब्द कोष होता है उसकी रचना शक्ति , संवाद शक्ति और संवेदना उतनी ही बढ़ जाती है । इसीलिए , अंग्रेजी भाषा को पूरी दुनिया में सबसे कमजोर भाषा में गिना जाता है । दुनिया के आधे से ज्यादा देश , रशिया , फ्रांस , जर्मनी , जापान , चीन जैसे कई देशों में इंग्लिश नही बोली जाती है । कुछ वर्षों पहले एक शोध हुआ था । एक तरफ इंग्लिश मीडियम के बच्चे और दूसरी तरफ हिंदी मीडियम के बच्चे बैठाए गए । दोनो तरफ के बच्चों का आई क्यू टेस्ट हुआ । बहुत प्रबुद्ध लोग , शिक्षाविद , वैज्ञानिक आदि इस प्रतियोगिता में उपस्थित थे । अंत में हिंदी मीडियम के बच्चों में , ग्रहण क्षमता , विचारों को व्यक्त करने की क्षमता और रचनात्मकता , इंग्लिश मीडियम के बच्चों से बहुत अधिक पाई गई । आजादी के बाद एक सुनियोजित षड्यंत्र के चलते हमारी शिक्षा व्यवस्था को तहस नहस किया गया , यह आज हमे पता चल रहा है । हमारी भाषा , संस्कृति और जीवन प्रबंधन पर कुठाराघात हुए । इसी का परिणाम है कि दुनिया की सबसे कमजोर भाषा हमे आसान लगने लगी है । आज समय बदल रहा है । जापान और जर्मनी जैसे देशों में हिंदी और संस्कृत के विश्विद्यालय खुल गए हैं जिसमे वहां के लोग हिंदी पर शोध कर रहे हैं । अमरीका जैसे देश में भी जय शहरों में ही , कई स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाने लगी है । हमे इस बदलाव में खुद को शामिल करना चाहिए। आपने घरों में ही बच्चों को हिंदी का महत्व समझाना चाहिए और उन्हें हिंदी के प्रति जाग्रत करना चाहिए । अपने घरों में तो समन्वय बोलचाल में हम हिंदी का ही प्रयोग कर ही सकते हैं । जब भी कुछ बिगाड़ना हो तो समय नहीं लगता , लेकिन सुधार करने में समय लगता है । धीरे धीरे जाग्रति आ रही है । कुछ समय अवश्य लगेगा , लेकिन सकारात्मक रुख रखेंगे तो एक दिन हिंदी भाषा को उसका गौरव मिल ही जायेगा । व्यवसाइक दृष्टि से इंग्लिश फिलहाल जरूरी है , लेकिन व्यवहारिकता में अपने बच्चों में हिंदी के प्रति रुचि को बढ़ाना होगा । हमारे प्राचीन ग्रंथों की कहानियों आदि की चर्चा , आध्यात्म के बारे ने सजगता और रोज मर्रा की जिंदगी में हिंदी के प्रयोग को प्राथमिकता देनी होगी । इधर कुछ समय से हमारे युवाओं में इस और झुकाव देखा गया है । रामायण ,महाभारत , आदि के बारे में युवाओं को चर्चा करते देखा गया है । हम उनके इस उत्साह को बढ़ावा दे सकते हैं । मैं बहुत समय से आध्यात्म , ध्यान , योग आदि की , जीवन में आवश्यकता पर जोर देता आया हूं । डिग्री कालेजों में लेक्चर भी दिए हैं । इसी तरह हम सब भी इस ओर प्रयत्न करें तो अच्छा होगा , मेरा यही संदेश है । हम वरिष्ठ और कनिष्ठ लोग मिल कर इस कार्य को आगे बढ़ा सकते हैं। स्वयं भी सीखें और दूसरों को भी बताएं । मेरा यही मंतव्य है ।
इसे किसी कानून द्वारा किया जाना न तो समीचीन है और न ही उचित। जैसे ही हिन्दी का प्रयोग आपकी प्रतिष्ठा से जुड़ेगा , आप स्वत: अपने रोज़मर्रा के व्यवहार में हिन्दी का प्रयोग करने लगेंगे।
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रोज़मर्रा के जीवन में हिन्दी का प्रयोग कैसे बढ़ाएं?