मोह माया का त्याग ! बस दूसरों के लिए
नमस्कार दोस्तों! जैसा कि आप सभी को पता कि आजकल सोशल मीडिया पर बहुत से तथाकथित बाबा लोग उपलब्ध है जिनका कहना है—“मोह-माया छोड़ दो, सब माया है।” और ये बात वे बड़े आत्मविश्वास के साथ कहते हैं… ठीक उसी समय जब वे अपनी चमचमाती लग्ज़री कार से उतरकर प्राइवेट जेट पकड़ने जा रहे होते हैं।
बाबा जी का दर्शन बड़ा सरल है—त्याग करो, पर केवल तुम करो!
बाबा जी तो बस “मार्गदर्शन” के लिए हैं… और मार्ग भी ऐसा कि सीधा पाँच सितारा आश्रम तक जाता है।
उनके प्रवचन में बैठो तो ऐसा लगता है जैसे जीवन का सारा सत्य मिल गया हो—
“धन-दौलत क्षणभंगुर है… शरीर नश्वर है… इच्छाएं त्याग दो…”
और प्रवचन खत्म होते ही वही बाबा जी अपने मैनेजर से पूछते हैं—
“आज का चढ़ावा कितना आया? और अगली फ्लाइट का टिकट कन्फर्म हुआ या नहीं?”
मोह-माया का त्याग सिखाने वाले बाबा जी के आश्रम में एंट्री भी VIP पास से होती है। साधारण भक्त बाहर लाइन में खड़ा रहता है, और VIP भक्त सीधे एसी हॉल में दर्शन करता है। शायद यही “आधुनिक मोक्ष का शॉर्टकट” है—थोड़ा ज्यादा दान दो, सीधे भगवान से कनेक्शन बनाओ।
बाबा जी कहते हैं—“सादा जीवन, उच्च विचार अपनाओ।”
और खुद इतने सादे हैं कि उनके कपड़ों की कीमत में एक आम आदमी का सालभर का राशन आ जाए।
उनका “उच्च विचार” भी इतना ऊँचा है कि वह सीधे बिजनेस क्लास में उड़ता है।
सबसे मजेदार बात यह है कि बाबा जी के भक्त भी बड़े भोले हैं।
बाबा जी की हर बात पर “वाह-वाह” करते हैं, लेकिन कभी ये नहीं पूछते—
“बाबा जी, अगर मोह-माया इतनी ही बुरी है, तो आप उसे इतनी मजबूती से क्यों पकड़कर बैठे हैं?”
शायद इसका जवाब भी बाबा जी के पास होगा—
“बेटा, हम तो तुम्हारी परीक्षा ले रहे हैं… तुम मोह-माया छोड़ सकते हो या नहीं!”
अंत में बस यही समझ आता है कि आजकल के बाबा लोग एक नई शिक्षा दे रहे हैं—
“मोह-माया त्यागो… ताकि हम उसे और अच्छे से संभाल सकें!”
और हम सब भक्तजन भी इस अद्भुत लीला को समझे बिना, ताली बजाते रहते हैं…
क्योंकि आखिरकार, माया तो हमें ही छोड़नी है—बाबा जी को नहीं। 😄
