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पुरुष

आज जब पिता जी से वीडियो कॉल पर बात हुई तो लगा के मेरे ऊंचे भूरे पिताजी, आज उम्र के एक पड़ाव पर पहुंच चुके हैं जिसमे हम आना नहीं चाहते, न ही भविष्य के इतने सपने देखने पर भी कभी यह सपना नहीं देखा था कि पिताजी को इस उम्र में देखेंगे । हालाँकि पिताजी स्वस्थ हे मस्त हे और ऊपर वाले से प्रार्थना है कि वे हमेशा स्वस्थ रहें।

पास ही में भाई भी बैठा था, जवान फुर्तीला भाई, वही जो बचपन में हमसे बात करने के लिए गर्दन और आवाज दोनों ऊंचीबकर लिया करता था, आज उसी को देख कर उमर का एक तकाजा यह भी लगा। और फिर बात करते हुए हमारे पतिदेव भी घर आ गए, काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे इसलिए काफी थके हुए लग रहे थे। लेकिन आते ही हमसे हमारे दिनभर का हाल पूछने लगे।। खुद थके हुए हो कर भी हमारी खुशी का ख्याल किया, 

और इसीलिए आज ये बात दिल में आई के पुरुष 

एक पिता, एक भाई, एक बेटा, एक पति, और न जाने क्या क्या होता हे और किसी स्त्री के समान अपने हर किरदार को बखूबी निभाने के लिए भरसक प्रयास किए जा रहा है।

लेकिन आज के समय में नारी शक्ति की बाते इतनी तेज हो रही है कि कही ये मेहनती पुरूष दबते जा रहे हे, हालांकि सभी उंगलियां एक समान नहीं होती है, वैसे ही हर स्त्री और पुरुष एक से नहीं होते। 

इसलिए अगर यह आर्टिकल पढ़ कर आप को।लगे के ओके इर्द गिर्द ऐसा पुरुष नहीं हे, तो मुझे माफ कीजियेगा के आपको अच्छा पुरुष दिखने नहीं मिला। बहरहाल,  आज का पुरुष थोड़ा और सपोर्टिव हो गया हे, अपनी बहन, बेटी, बीवी को पूरा प्यार और साथ देता हे उनके सपनों के लिए खुद भी पूरी जान लगा देता हैं। न जाने बाहर कैसे कैसे लोगो से मिल कर क्या क्या सहना पड़ता होगा।

और बदले में क्या मिलता हे?? तुम तो पुरुष हो स्ट्रांग बनो, पुरुष रो भी नहीं सकता बेचारा और अगर रो दे, तो नाजुक बना दिया जाता है।

मेरे ख्याल से ये मेहनती पुरूष काबिल है तारीफ के साथ के और हमारे मान सम्मान के भी। जो खुद सब कुछ सह लेते हे एक छत के समान और हमें देते हे सुरक्षा। 

एक दोस्त के रूप में सब से भरोसेमंद इंसान साबित होते हे जलन की कोई भावना होती ही नहीं हे जहां एक से दो पुरुष मिल जाए वही बातों का सिलसिला चल पड़ता हैं और बाते होती हे हंसी ठहाके होते हे। हम महिलाएं तो खुद एक दूसरे को सह नहीं पाती जलन तो जैसे हमारा गहना हो, और ये आधी रात को साथ देने वाली दोस्ती??? किसी पुरुष से ही उम्मीद की जा सकती हे। 

स्त्री भी कम नहीं हे किसी से लेकिन मेरा आज का आर्टिकल बस पुरुषों के लिए हे इसीलिए आज बस उन्हीं की तारीफ़ करूंगी। क्यों कि वो हक़दार हे इस तारीफ के जो बाहरी दुनिया से बहुत कुछ सह कर घर आते हे लेकिन घर और परिवार के सदस्यों को अपनी तकलीफ नहीं बताते आसानी से। वो मेहनत कर के पढ़ लिख कर आगे बढ़ते हे एक अच्छी नौकरी करते हे, लेकिन कभी ये नहीं कहते कि ये मेरे पैसे हे मैंने कमाए हे इसपर पहला हक मेरा है। बल्कि उन्हीं की कमाई पर पूरा घर इतराता है। अगर पुरूष न हो तो स्त्री अधूरी है। उसका पूरा संसार अधूरा है। एक अच्छे और सभ्य पुरुष की जरुरत इस समाज को हमेशा से। इसलिए हे सभ्य पुरुष ! तुम्हे मेरा नमन। 

और जो पुरुष खुद के वजूद को औरों के वजूद से बड़ा समझते हे, उम्मीद करती हु आप जल्दी ही खुद की खूबियों को पहचानेंगे और एक ऐसा पुरुष बनेंगे जिस के साए में हर स्त्री सुरक्षित महसूस करे। 

मेरे इस ऑर्टिकल से अगर कोई बात समझानें में कमी रह गई हो या पाठक को निंदनीय लगी हो तो मुझे माफ करे।

लेखिका - श्वेता चौहान 





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