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शायरी

नदी है तो मिलेगी समंदर से।
बिगड़ी है तो संवरेगी मुकद्दर से।
जो तेरा है,मिल ही जाएगा तुझको।
वरना दुनिया कहां फतेहा हुई सिकंदर से।

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