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तिनका तिनका उड़ा आशियां ले गईं

तिनका तिनका उड़ा आशियां ले गईं,

मेरे ख्वाबों का घर आंधियां ले गईं ।।


सात तालों में जिसको छुपा के रखा,

उनके घर की खुली खिड़कियां ले गईं।।


फूल सूखे किताबों के फिर खिल उठे,

उसकी खुशबू चुरा चिट्ठियां ले गईं ।।


मुद्दतों बाद देखा तसल्ली हुई,

छत पे फिर से मुझे सीढियां ले गईं।।


अबकी बरसात में हम भी बच्चे हुए,

कागज़ों की बनी  कश्तियां ले गईं ।।


नींद का आंख से राब्ता ना रहा,

घर में होती बड़ी बेटियां ले गईं ।।


गीता सिंह "शम्भुसुता"



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