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वो कहते हैं....

वो कहती हैं :-

पीते हैं कई आंखों से,

कुछ होंठों से चखते हैं,

इस जाम की लत से यारों,

अच्छे अच्छे भी फिसलते हैं..

ज़ुबान को छूते ही, 

दिमाग पर असर करती है,

ये शराब है जनाब,

घरवाली को भी बेघर करती है...


मैं कहता हूं :-

नज़र धुंधला जाए फिर भी,

सही सलामत पहुंच जाता हूं,

दोनों की आदत से मजबूर हूं मैं,

ना जाम, ना जानेमन छोड़ पाता हूं..

भूल जाऊं किसी एक को भी तो,

बेवफ़ाई दोनों से होगी,

देती दिलरुबा दर्द है जो,

जाम की कड़वाहट संग निगल जाता हूं,

और सीने में जलन जो होती पीने से,

उसे तेरी नाराज़गी से कमतर समझता हूं..


Nishi ✍️

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