काश पतंग बन जाऊं
काश आज मैं पतंग बन जाऊं
काश आज मैं पतंग बन जाऊं,
मकर संक्रांति पर घर-घर जाऊं ||
आज मैं बार-बार कटकर,
लोगों की खुशी बन जाऊं ||
लोग मुझे पाने को दौड़ लगाएं,
घर-घर जाकर मकर संक्रांति मनाऊँ ||
कभी इस तो कभी उस घर जाऊं,
सबके चेहरे की खुशी बन जाऊं ||
मकर संक्रांति है सबका प्यारा,
आज पतंग बन लोगों की खुशी बन जाऊं ||
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प्रहलाद नारायण माथुर
