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काश पतंग बन जाऊं

काश आज मैं पतंग बन जाऊं


काश आज मैं पतंग बन जाऊं,

मकर संक्रांति पर घर-घर जाऊं ||


आज मैं बार-बार कटकर,

लोगों की खुशी बन जाऊं ||


लोग मुझे पाने को दौड़ लगाएं,

घर-घर जाकर मकर संक्रांति मनाऊँ ||


कभी इस तो कभी उस घर जाऊं,

सबके चेहरे की खुशी बन जाऊं ||


मकर संक्रांति है सबका प्यारा,

आज पतंग बन लोगों की खुशी बन जाऊं || 


*****

प्रहलाद नारायण माथुर

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