तुम बसंत से आए
जीवन के वीराने में
तुम बसंत से आए
मन की कलियां खिलने लगी
तुम बाहर बन आए।
सांसों में फूलों की खुशबू महकने लगी
तुम भंवर से आए।
जैसे टूटा हो शिव का वियोग
तुम कामदेव से आए।
मन के भीतर,
खिलने लगे प्रेम के फूल
तुम बसंत से आए।
अनीता चेची, मौलिक रचना
