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कुछ लोग

.     ।।  *कुछ  लोग* ।।


   होते हैं कुछ लोग ऐसे,

         जिन्हें जमाना ढूंढता है।

वे जमाने को नहीं ढूंढते ,

तकदीर उन्हें तलाश करती है, 

     वे तकदीर की तलाश नहीं करते।

 राह उन्हें मिल जाती है, 

          वे मंजिल की तलाश    

                          नहीं करते ।

नाज होता है,

          उन्हें अपने पर, 

भाग्य होता है उनका बलवान ।     

       मंजिल उन्हें मिल जाती है,     

          वह  नहीं करते मंजिल    

                          की तलाश। 

           कुछ लोग ऐसे होते हैं,

जो लाखों में पहचाने जाते हैं।

          जमाना उनसे होता है, 

वो जमाने से नहीं होते। 

होते तो है वह इंसान,

     पर जमाना उन पर होता है।     

          चलते तो है वह राहों पर, 

       लेकिन मंजिल खुद उनके पास आती है।

         उन्हें नहीं होती है रहा की तलाश,

 लेकिन रहा उन्हें खुद मिल जाती है। 

कुछ लोग ऐसे होते हैं. जो लाखों में पहचाने जाते हैं। 

होता तो है उनका बचपन,

   पर जमाना उनको पुकारता है।

वे जमाने को नहीं ढूंढते, 

जमाना उनको ढूंढता है।

 कुछ लोग ऐसे होते हैं, 

जो लाखों में पहचाने जाते हैं। 

भाग्य होता है उनका बलवान, वह भाग्य के पास नहीं जाते है। 

          लाती है तकदीरउन्हें         

                 संसार के सामने,

 वे खुद नहीं आते सामने।

 सच्चा जीवन होता है उनका, बाकी सब इंसान होते हैं। 

कुछ लोग ऐसे होते हैं,जो लाखों में पहचाने जाते हैं।


         ।। वंदना सोनेकर/बोरीकर।।

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