सतगुरु
तिथि-01-2024
वार-शुक्रवार
काफिया-आना
रदीफ- याद है
गजल वेबहर
सतगुरु तेरे चरणों में सर को झुकाना याद है।।
हमें उठा कर आप ने, वो गले लगाना याद है।।
प्यार की थपकी जो दी थी हमारी पीठ पर।
सहज ही दीदार तेरा वो मुस्कुराना याद है।।
दिलों की जानता है तू तुझे कैसे बताऊं मैं।
हर हाल में तेरा प्रभु वादा निभाना याद है।।
एक झलक पाने को तेरी रहते थे बैचेन हम।
आकर अचानक समने वो चौंकाना याद है।।
दूध जलेबी नाश्ता सबकों कराते आप थे।
आपके हाथों से खाना वो खिलाना याद है।।
रहकर चुप सबकुछ कहे थे हुजूर आप तो।
संतों के संग सेवा में तसला उठाना याद है।।।
स्वरूप था नादान अनदेखा किया आपको।
मुझ जैसे नालायक को तेरा निभाना याद है।
सूबेदार रामस्वरूप कुशवाह बैंगलौर कर्नाटक
