सजल
जय माँ शारदे
दिनांक -04/04/2024
विधा - सजल
चला मुसाफिर , मंजिल की तलाश में ,
मिलेगी एक दिन जरूर , इस आश में।
मुश्किलें थी बहुत , चला वो ढूँढने ,
शत्रु भी मिले बहुत , फंसा पाश में।
मित्र जब मिल गया , उमंग जाग उठी ,
राह सरल हुई , भू से आकाश में।
कौन कब साथ दे ,कौन कब दे दगा ,
नहीं पता ,कौन धकेले विनाश में।
सीख बात इतनी , होश रख जोश में ,
हरि शरण जो रहे , वो है प्रकाश में।
डॉ संगीता पाहुजा
दिल्ली©
स्वरचित
