वजह
. *।।*वजह* ।।*
रोने की वजह नहीं होती, इंसान रोता ही हर दम है।
वह चाहे तो मुसीबत में भी हंसकर रास्ता बना लेता है।
जहां रास्ता मिल जाए, खुशी अपने आप आ जाती है।
इंसान भूल जाता है, यही कर्मों का फल है।
फल को गिनने में कर्म भूल जाता है, बस वही फल रूठ जाता है।
और इंसान फिर उसी दलदल में फस जाता है।
वंदना सोनेकर / बोरीकर
