आओ करें पुरखों को नमन
कि जिनसे हम हैं,
और जिनसे है हमारा ये चमन,,
आओ करें आज उन पुरखों को नमन,,,
करुणा से भरे वो सागर हैं,
गुणों से भरे गुणागर हैं,,
वो हैं तो हम हैं,
कि उनका नित आब हम करें वन्दन,,,
मेरे पिता पर पितामह,
मेरी चोट पे करते आह,,
उनको सब अर्पण,
कि पिण्ड दान कर सब करें तर्पण,,,
जिते ज़ी तो प्यार किया,
मर के भी उपकार किया,,
सदिच्छा सद्गति को प्राप्त,
ऐसे पुरखों का हम करें आचरण,,,
कि जिनसे हम हैं,
और जिनसे है हमारा ये चमन,,
आओ करें आज उन पुरखों को नमन,,,
