हम व्यापारी
एक व्यापारी होता है,
जो व्यापार करता है,,
ये उसका पेशा होता है,
और वो इसी में ख़ुश होता है,,
दूसरी तरफ आज वहीं ज़ी रहा है,
जो हंस कर यहाँ गरल पी रहा है,,
या नहीं तो फ़िर दुनिया से,
दुनियादारी की बातें करता है,,
और कुछ यूँ पेश आता है दुनिया से,
जैसे कि दुनिया उसके बाप की हो,,
लाभ हानि सर्वस्व जोड़ता है,
आप तो आप बाप का दिल भी तोड़ता है,,
वो किसी को नहीं छोड़ता ख़ुद को भी नहीं,
और तो और उस ख़ुदा के वजूद को भी नहीं,,
आज स्वारथ है बन्धु सर्वस्व बना हुआ,
इसलिए तो अर्जुन का है श्रीकृष्ण से ठना हुआ,,
अर्जुन का है श्रीकृष्ण से ठना हुआ,,,,,
