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गजल

गजल 

क़ाफ़िया - कैसे भुला दे 


दिल से तेरी यादों को भला कैसे भूला दे |

यादें ही सहारा जीने की कैसे भूला दे ||


उम्र भर साथ देने का वादा किया था कभी,

ये भरोसा दिल से बोल कैसे भूला दे |


जिंदगी भर मैं तेरा इंतजार करुँगी,

ये हक हैं मेरा तू कहे थे कैसे भूला दे ||


लाख शिकवे थे तेरे मेरे बिच में,

प्यार भरी बाते को हम कैसे भूला दे |


मेरे आँसू की भला तुम्हे परवाह नहीं,

दर्दे दिल तेरा जो हाल था कैसे भूला दे ||


याद करो तूने जो मुझसे बाते की,

मैं ही तेरी हमदर्द कैसे भूला दे |


चोट हमने मोहब्बत में खाई तो क्या,

तेरे जख्मो का एहसास भी कैसे भूला दे ||


आज अकेली हूँ यहाँ भीड़ो में सही,

तुझे भी मेरी चाहत ये कैसे भूला दे |


दर्द देकर जो तुम मुस्कुराते हो,

मैं ही तेरा सुकून कैसे भूला दे||


पायल अग्रवाल छनक

स्वरचित 

मुज़फ्फरपुर 

बिहार 

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