मेरे ख़ाली कमरे में
मेरे ख़ाली कमरे में,
मैं,
मेरी यादें,
और मेरा दिल,
सब मिलजुल कर रहते हैं,,
और पता है आजकल,
उसमें,
तुम,
तुम्हारा दिल,
और तुम्हारी यादें भी,
रहनें लगीं हैं,,
ख़ैर अच्छा है,
मैं,
कब से अकेले अकेले,
रह कर,
उब सा गया था,,
अब तो ऐसा लगता है,
मानों,
एक मेला हो,
और मैं उसमें,
खो जाऊँ,
हमेशा हमेशा के लिए,,
