अगर मैं 1947 में होता...
मैं भला जश्न कैसे मना पता,...।।
जीवन में कभी - कभी ऐसे पल आते हैं,
जो खुशी और पल का समागम लिये होते हैं।।
सन 1947 का हाल भी कुछ ऐसा ही था,
जहां एक ओर सदियों के गुलामी की जंजीर
टूटी थी, हर्ष की लहर व्याप्त था...।
लेकिन मैं भला जश्न कैसे मना पाता, ।।
क्योंकि दूसरी ओर देश विभाजन के ज्वाला
में झुलस रहा था,
भाई से भाई बिछड़ रहे थे,
देश में खूनी दंगे भड़क रहे थे...।।
कई बेगुनाह बेसमय काल के गोद में समा रहे थे,
मेरा देश हिन्दू और मुस्लिम में बंट गया था,
भारत अब अखण्ड ना रहकर
भारत और पाकिस्तान के सरहदों में बंट गया...।।
कैसे हुआ, मुझे तो पता ना चला...
बताओं मैं भला मैं भला जश्न कैसे मना पता..।
विभाजन के त्रासदी के जख्म कई परिवारों
के आज भी ताजा है,...
आज कर ली तरक्की हमने, चांद को छू लिया हो,
पर मेरे गांव की मिट्टी ,मेरे दोस्त,मेरी हवेली
कुछ छुट गया है, भारत में,तो कुछ पाकिस्तान में,
देश आजाद तो हुआ, विकास तो हुआ,
पर सरहदों में बंट गया...।।
हम सब एक हैं ,बोलने वाले भारतवासी
आज धर्मों के दंगों में बंट गये...।।
बताओं,
मैं भला जश्न कैसे मना पाता।।
@KRISHAN KANT SEN
© जागृति शर्मा
