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कहा था ना आऊंगा तेरी शादी में..!

  1. हो रही थी शादी उसकी, मण्डप में नजरे झुकाए बैठी थी... मण्डप में देख उसको, मेरे आंखों से आंसु झलक पड़े... मेरी आखरी मुलाकात, अपने खून से लिखा खत ध्यान से पढ़िएगा... खुद को तेरी यादों का गुलाम कर दिया, तेरे खातिर खुद को बदनाम कर दिया और क्या सबूत दूं मैं अपनी मोहब्बत का, मेरे पास एक दिल था वो भी तेरे नाम करदीया.... तक़दीर में आपसे मिलना लिखा था, आपका मिलना नहीं तेरे जाने के बाद मंदिर देख कर सर तो झुक जाता है... मगर अब कुछ माँगने का दिल ही नहीं करता हैं..!

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