वो नो वर्ष कि लड़की
लाल गुलाबी
कभी हरी पीली
पोशाक पहने उड़ती
धरती पर पैर न पड़ते
बिखरे बालों के साथ
लहराती चलती
पतंग सी
तीन वर्ष बाद-
वर्जनाओं की
डोर माँ ने बाँधी
न रुकी यूँ ही
मचलती रही
सँवारे बालों के साथ
ठुमकती रही वो
पतंग सी
धरती की हवा में
थमी थमी सी
डोर पकड़,दी उड़ा
किसी ने गगन में
अनंत विस्तार में
अनंत सपने लिए
वो उड़ी,उड़ती रही
पतंग बन
उड़ी यहाँ वहाँ
जाने कहाँ कहाँ
लाल गुलाबी हरे
पीले रंग मयी
साथ लिए
डोर का बंधन
न, मचलती नहीं
अब पतंग सी
पतंग होने
पतंग बनने
पतंग सी का
अंतर मन में उतरता
ढूँढती अपने को
बहुरंगे अस्तित्व में
बँधी किसी उँगली
की डोर में
जाने कहाँ गयी वो नौ वर्ष की लड़की
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लेखिका -रश्मि पाठक , एबरडीन यूके
(अस्थायी)
स्थायी पता -मोदीनगर उ.प्र
भारत
