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कैनवास एक, रंग अनेक..

कैनवास एक, रंग अनेक..


​कोई रंग तपस्या जैसा,

कोई रंग श्रृंगार है।

कोई गहरे नीले में

समंदर की फुहार है।


​क्रोध, शर्म की है अलग नाव,

पर लाल कहता दोनों भाव।


​मिट्टी सा सोंधा कोई,

कोई मधुर गान है,

जो चुभता है आँखों को,

वो नुकीला स्वार्थ बाण है


​ये जो धुंधला सा है, संघर्ष है,

इस चमकीले को कहते जीत है।

एक रंग जो कायम है,

उस रंग का नाम प्रीत है।

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