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*नारी शक्ति और संघर्ष*

*नारी शक्ति और संघर्ष*
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बड़ी मुसीबत से मैंने मंज़िल पाया है,
कमज़ोर न समझो मुझे, मैंने जग पाया है।
राह में थे काँटे, मगर फूल बिछाया है,
खुद को ही समझाकर, मैंने खुद को पाया है।
क्या समझा था दुनिया ने — बेटी क्या कर पाएगी?
एक बेटी ने ही बेटी बनकर राह दिखाया है।
दिखाकर साहस नारी ने,
माँ बनकर बेटी को आगे बढ़ाया है।
जीवन की कठिनाई समझाकर
उसे चलना सिखाया है।
नारी की शक्ति को समझकर
उसे कभी कमज़ोर न बनाया है।
इसीलिए 8 मार्च को
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया l

(स्वयं रचित)
वंदना सोनकर /बोरीकर

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