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वक्त के थपेड़े

तेरे पैरों के छाले बता रहे हैं,

ईमानदारी की राह पर चला होगा,

सिर की सफेदी बता रही है,

एक निवाले की खातिर,

हजारों दिन धूप में जला होगा,

तेरी अकेले की नहीं,

हजारों की यही कहानी है,

बुरे वक्त की और गरीबी की,

यही तो निशानी हैं,

शायद कल कुछ अच्छा होगा,

यही सोच कर जिंदगी जी जाती हैं,

फिर अगली सुबह ग़म की, 

एक नई आहट आ जाती हैं,

भरोसा खुद पर करें,

या अपने नसीब पर,

गैरों पर या अपने करीब पर,

फिर एक दिन अपने ही,

श्मशान में आग लगा देते हैं,

अगला जन्म ठीक होगा,

यही आस जगा देते हैं।

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