भुल हुआ मुझसे
किसी का अनादर ठीक नहीं, भुल हुआ मुझसे।
अब उसे सुधारना चाहता हूँ, भुल हुआ मुझसे।
कभी अपथ पर चलना ठीक नहीं, भुल हुआ मुझसे।
पछतावा ही हाथ लगा हरदम, भुल हुआ मुझसे।
किसी का हँसी उडा़ना ठीक नहीं, भुल हुआ मुझसे।
अब कभी न हँसी उडा़ऊंगा, भुल हुआ मुझसे।
किसी पर झूठा आरोप लगाना ठीक नहीं, भुल हुआ मुझसे।
अब किसी पर आरोप नहीं लगाऊंगा, भुल हुआ मुझसे।
मेहनत से दूर भागना ठीक नहीं, भुल हुआ मुझसे।
मेहनत में ही समय लगाऊंगा, भुल हुआ मुझसे।
मेहनत की दो रोटी को कम समझा, भुल हुआ मुझसे।
अधिक रोटी पाने को भटकता रहा, भुल हुआ मुझसे।
गिरधारी लाल चौहान
सक्ती छत्तीसगढ़
