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वटवृक्ष से वृद्ध

 

वटवृक्ष से होते वृद्ध,

ज्ञान की जड़ें अत्यंत गहरी..

नन्हें कोमल पौधों को,

नव कोंपलों को बढ़ने की सीख देते..

 

जीवन के कठोर अनुभव झेलकर,

तनकर खड़े हैं, ना घबराते..

समर्पण भाव से सदा ही सराबोर...

हर तकलीफ व रोग से राहत देते।

 

फल,फूल सब प्रेम, नेह,सा इनका,

बरसा हम पर, चिंता की चुभन मिटाते..

मनोरोग, या तन की पीड़ा, 

सबके उपचार की पुड़िया ये रखते...

 

सीख अनोखी शाखाओं को सिखलाते,

झुककर, भी कैसे मज़बूत हो सकते..

धरती से जोड़कर उनको वह,

जैसे अपने वंश को निरंतर बढ़ाते...

 

वास देवी देवताओं का होता इसमें,

मां-बाप भी क्या इनसे कम होते!?

समझ लो वट, बड़ उनको ही सब तो,

जीवन में कभी फिर कष्ट ना मिलते...

 

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