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काश

काश हम गुलाब का फूल होते 

सुखनेके बादभी यादोंसे गुजरकर आपके ओठोंको झुते।


काश हम मयूर पंख होते,

बंद किताबमें भी आपकी धडकनोंको सुनतें |


काश हम बादल होते,

बेइंतहा बरसकर आपकी तपिशको मिटाते।


काश हम आसमान होते,

दूनीयांसे चूराकर आपको हमारे आगोशमें भर लेते।


काश हम काजल होते,

खुदको आपकी ऑंखोंमे समा लेते और हमेशाकेलीऐ वहीपे बस जाते।


नयना..

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