छंद बद्ध रचना//शिर्षक धरती अंबर
*अक्षि छंद अर्द्ध सममात्रिक-नवप्रस्तारित-26 मात्रिक*
*10-16(समांत-22 ))((112 -पदांत)*
*सृजन पंक्ति:-साथ पिता जब हो, धरती अम्बर सारे अपने।*
साथ पिता जब हो, धरती अम्बर सारे अपने।
बचपन की हरपल, लगते चाँद सितारे अपने।।
दिव्य ज्ञान पाकर, प्रतिदिन सफर सुहानी लगती।
जैसी बर्षा की, शीतल बूँद लुभानी लगती।।
उन आँखों में थे, प्यार भरे गलियारे अपने।
बचपन की हरपल, लगते चाँद सितारे अपने।।
सुख में हम फिरते, चिंता पिता छुपाते रहते।
हास्य चेहरा पर, भीतर से अकुलाते रहते।।
राह निखारे वे, स्नेहिल मौन इशारे अपने।
बचपन की हरपल, लगते चाँद सितारे अपने।।
*पद्माक्षि शक्ल "अक्षि" पुणे*
