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तेरे लिए

तेरे लिए ये नज़र उठी 

और झुकी सिर्फ तेरे लिएं 

इंतजार में गवाईं रातें

जमी औ आसमान तेरे लिएं 


यहां की जन्नतों में

नशा आपके प्यार का

मेरे लिए तो हर एक दिन

आपके इज़हार का।


कलियां भी खिली है

मौसम आशकाना सारा

भुल नहीं पाएंगे 

मोहबत्तों का यह नजारा


कु.मनिषा भिमराव बिऱ्हाडे/काव्य तारका 




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