बरसात
पहली – पहली बरसात में
जब मिले हम तुम
बिजली नाचे बादल में
दोनों मदहोश और गुम ||1||
टकराई जब नज़र
जाम घुला आंखों – आंखों में
हंसी खिली प्यारी– प्यारी
दिल मिला बातों– बातों में||2||
बिजलीने यूं ढाया कहर
बाहों के पहने हार
आपके प्यार में मदहोशी
दिल बेचारा तार– तार ||3||
बूंदों में भिगकर ठंडी
इजहारे मोहोब्बत हुई
पास आएं, मिले गले
रंगों में भिगी दुनियां नई||4||
कु. मनिषा भिमराव बिऱ्हाडे/काव्य तारका
