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आंखें

आंखों की कहानियां 

लिखी नहीं जाती

मोहब्बत तो मोहब्बत हैं यारों

बेची किसीको नहीं जाती||1||


जब नाम फिजाओ में 

चमकने लगा आशिक़ बनकर

जालिम दुनियां की बेवफाई

सही नहीं जाती ||2||


इश्क के बागान में दोनों 

छुप – छुप कर मिलने आएं

दास्तां –ए –मोहब्बत जलने वालो से

बस कहीं नहीं जाती ||3||


दिल मिला दिल से तो

भंवरा फुल संग डोले

तेरी मेरी मोहब्बतें देख

कलियां भी शरमा जाती||4||


आंखों – आंखों में बातें

बिन लफ्ज़ होने लगी

सुद नहीं तुझे मुझे

प्यार में तेरे संवर जाती ||5||


कु. मनिषा भिमराव बिऱ्हाडे/काव्य तारका 




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