तितली
उड़ उड़कर बैठी
तितली सुंदर– सुंदर रानी
रंग पिला, सफेद, नारींगी
मधुरस पिती जैसे पानी ||1||
दोनों की कहानी प्यार की
पागल –पागल बनता फुल
पंखुड़ी शरमाएं जब – जब
तितली कहती खुल खुल खुल ||2||
ठंडी – ठंडी लहर हवा की
प्यार का संदेसा लाती
फुल की मिठी – मिठी बोली
सरगम तितली को हैं भाती||3||
भोली भाली तितली प्यारी
जी पाती बस दो ही दिन
फुली नहीं समाती फुल संग
सपने प्रेम के गिन गिन गिन||4||
कु. मनिषा भिमराव बिऱ्हाडे/काव्य तारका
