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दुनियां

जब भी देखी ध्यान ज्ञान से

दुनियां लगती गोल –गोल 

इतनी हरी , खिलती धरती

अमूल्य लगती ना हैं तोल ||1||


घूमना इसका जादुई

बच्चे सोचे ऐसा क्यूं क्यूं क्यूं ?

जवाब इसका बड़ा सरल

यहीं निसर्ग है यूं यूं यूं ||2||


इसपर उगते पेड़ों –पौधें

हरियाली से महके कोना

जन्नत जैसी नदियां, झरने

धरती का हैं जादू –टोना||3||


प्यार इसका अंबर से लगता

चांद, सितारे सजते यहां !

प्रेम में डुबी धरती मैय्या

इससे खिला जहां –जहां ||4||


इसे बचाओ, पेड़ लगाओ

तब टिकेगा इसका पानी

खिलकर मुस्काएगी अपनी

धरती रानी धानी –धानी ||5||


कु. मनिषा भिमराव बिऱ्हाडे/काव्य तारका 

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