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फुल

फुल फुल मैं देखू सुंदर

पिले, नीले, गुलाबी,लाल

मन भावन बागियां देखू

खिलते मेरे गुलाबी गाल ||1||


हरी घास छू जाएं पांव को

जैसे गालिचा हरा !

प्रेम भरा मृदु स्पर्श हैं

कितनी सुंदर यह धरा?||2||


जुड़ी निसर्ग से प्रित ये गहरी

मत तोड़ों ये जंगल झाड़ी

सदा रहे खिला ये उपवन

सजती रहे निली पहाड़ी ||3||


कु. मनिषा भिमराव बिऱ्हाडे/काव्य तारका 


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