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पायल

छुम छुम बाजे पायल

जब जाती नदियां तीर

कैसे कहे सावरे मोहन?

दिल में कैसी पीर ! ||1||


गय्या भी राह देखती

मुरली तेरी जब जब बाजे

आंखे लगती पथ पर

सिंगार सुंदर साजे ! ||2||


मुरली की सुरीली धुन पर

नाच उठी राधा गोरी !

कान्हाने झलक दिखादी

रंग दी चुनर कोरी – कोरी! ||3||


पायल भी बजती झुमकर 

मुरली धुनपर डोले –डोले

राधा प्यारी मिलती गले फिर

आंखे प्यार की बोली बोले||4||


कु. मनिषा भिमराव बिऱ्हाडे/काव्य तारका 





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