चांद
एक चांद आसमान में खिला
एक जमीन पर मुसकाया
देखू यहाँ की देखू वहां
चांद जमीपर भी उतर आया ||1||
ओंठ भी हैं लाल – लाल
आंखें तेरी शराबी प्यारी
मुस्कान खिली चेहरेपर
प्यार की अजब खुमारी ||2||
कभी फुलों जैसी महकती हो
बातें करती हलकी – हलकी
अपने में हो तुम सुंदर
बार –बार मैं देखू झलकी ||3||
एक राह चलते चलते
चंदा संग थामा हैं हाथ
यूं ही देना सुबह शाम तुम
प्यारे चंदा मेरा साथ ! ||4||
कु. मनिषा भिमराव बिऱ्हाडे/काव्य तारका
