कान्हा
कान्हा तेरी मुरली
मोह लेती मोरा मनवा
बरखा भिगी – भिगी
प्रिती में जलाएं तनवा ||1||
गगरिया भरन मैं तट आ बैठी
यमुना तिरन तोहे मिल पाऊं
मुरली तेरी मोहन बाजे
मधुर गितवा से रीझ रीझ जाऊं ||2||
आया कान्हा , बगिया डोले
राधा रानी खिल खिल जाती
सीमा लांघे प्रीत मन भाएं
कन्हाई संग राधा प्रेम गीत गाती ||3||
कु. मनिषा भिमराव बिऱ्हाडे/काव्य तारका
