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तिरंगा फहरा दो

फहराकर तिरंगा भारत देश का,
भारत को खोखला करते हैं।
क्यों मनाते पंद्रह अगस्त वो,
जो हर पंद्रह दिन में लड़ते हैं!?

एकता की मिसाल लिए,
तिरंगा ऊंचा लहराता है।
शिखर तक जाए शान देश की,
गौरव से बतलाता है।

नील चक्र के चौबीस पंक्तियां,
करवाती हर घंटे हमको हैं भान।
देश हित में विचार रखो सदा,
विश्व में बढ़ाओ देश का मान।

तीन रंगों की समझ महत्ता,
करें यदि इसका सम्मान।
शांति, हरियाली, शहीदी ही,
बनाती है एक देश महान।

भूल गए हम भारत वासी,
जतनों से मिली अनमोल स्वतंत्रता।
लड़ झगड़ कर, पर मति चलकर,
क्यों राह चुनें हम फिर परतंत्रता।

क्या रखा है बोलो इस जंग में,
सम लाल लहु बह जाते हैं।
किस धर्म का खून अलग है,
कौन साहब पहचानते हैं..?

जी पाएं नागरिक चैन अमन से,
इस खातिर शहीद कई हो जाते हैं।
जीवन न्योछावर कर भारत मां को,
जन्मदात्री को गर्वित कर जाते हैं।

नहीं यदि कुछ कर सकते हम तो,
इतना प्रयत्न अवश्य करें।
हर घर तिरंगा फहराकर इस वर्ष,
एकता की शुद्ध श्वास भरें।

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