मिरा
उसने प्यार से जब पूछा,
क्या बनोगी मेरी राधा,
या करोगी रुक्मिणी सा शृंगार साधा?
बस देख के आँखों में उसकी, वह हल्की सी मुस्कुराई और पूछा,
अगर बनी मैं राधा तो क्या,
आप कान्हा बनके बांसुरी छोड़ पाओगे?
अगर बनी मैं रुक्मिणी तो क्या,
कृष्ण बनके गोकुल भूल मेरे हो जाओगे?
मुझे बस मीरा ही रहने दो,
तो ही सच्चे मन से श्याम बनके भज पाओगे,
और श्रद्धा-भक्ति से, प्यार से पूजे जाओगे।
मुझे जीवनभर मीरा ही रहने दो घनश्याम,
तो आप हमेशा हमारे दिल में ही रह जाओगे।
@ नयना
