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कोजागिरी पूर्णिमा

कोजागिरी पूर्णिमा

अश्विन मास की शुक्ल पूर्णिमा को,
होता शरद पूर्णिमा का यह पावन त्योहार,
'कौमुदी व्रत' के रूप में भी जो जाना जाता,
देता सुख, समृद्धि और आरोग्य का वरदान..

सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर चंद्रमा,
जैसे ही चमकीले नभ में अवतरित हुआ,
देखकर उसे श्रीकृष्ण ने गोकुल में,
रची अलौकिक महारास की क्रीड़ा..

रतजगा देखने देवी लक्ष्मी स्वयं,
इस सुंदर भूलोक पर उतर आईं,
और 'कौन जाग रहा? कौन जाग रहा?' कहती फिरे,
यहीं से इस मंगल 'कोजागिरी' की उत्पत्ति हुई..

इस चांदनी रात में चंद्र की किरणों की,
होती सभी जीवों पर अमृत वर्षा है,
भक्तिभाव से जो दुग्ध-शर्करा के प्रसाद का करते सेवन,
उन्हें प्राप्त होता अमरता का वरदान है..

@नयना

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