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. शिक्षक

. *।। शिक्षक ।।*
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शिक्षक हूं मैं शिक्षक हूं ,
इस पर गर्व है मुझे ।
बच्चों के जीवन की नई नीव रखू,
यही सौभाग्य मिला मुझे ।
न कोई समझ पाए हमें,
फिर भी लगन से काम करू।

मां, बहन ,बेटी होकर भी,

सबसे पहले शिक्षक का फर्ज निभाऊ।
जीवन का हर पल बच्चों को अर्पित करू।
अपनी खुशी से पहले ,
बच्चों की खुशी पूरी करूं।

लगन, मगन से उन्हें पढ़ाऊ,
हर बच्चे में उम्मीद जगाऊं।
ज्ञान की ज्योति उनके मन में जलकर,
उनके सपनों को पंख लगाऊं,
शिक्षक हूं मैं शिक्षक, इस पर गर्व है मुझे।
धन, दौलत, पैसा न कमाया,
पर अनगिनत जीवन संवारा।
शिक्षक हूं मैं शिक्षक हूं ,
इस पर गर्व है मुझे ।

स्वयं रचित
वंदना सोनकर /बोरीकर
जबलपुर

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