मेरी कविता
तुम बनकर आए हो कविता मेरी ज़िंदगी में,
मेरे शब्दों से, मेरी कलम से तुम उतर गए हो,
इस कागज़ पर, मेरी लिखाई बनकर,
जो दिखता है मेरे दिल का हाल, जहाँ बस तुम ही समाए हो।
मैं जानती हूँ कि ये दिन, ये रातें, ये मौसम, ये सौगातें,
सब कुछ बदल जाएगा एक पल में,
पर तुम बनकर मेरी कविता,
मेरे रोम-रोम को सजाते रहना,
बसकर मेरे ख्यालों में हमेशा,
मेरे दिल को यूँ ही रिझाते रहना...
@नयना
