लाजवाब लेडीज़
नाम तो यूं लापता लेडीज़ है, पर मेरी नज़र में वो लाजवाब लेडीज़ हैं।
समझदार को इशारा काफी है कहते हैं, और डूबे को तिनके का सहारा कहते हैं।
ये दोनों ही मिसालें सच कर दिखाई इन्होंने, हम इनमें एक सच्चा इंसान देखते हैं।
जो अपने सपनों को सच करने की हिम्मत रखती है, जो काबिलियत को अपनी कैसे बखूबी समझती है।
गुण जो भी सिखाया उसे निखार लिया। बदलते समय संग अपना रूप व्यक्तित्व निखार लिया।
औरत होने का असली मतलब जो समझाती, वो स्टेशन पर दादी असल में आयरन लेडी कहलाती।
छिपी कला को साथी की, कुछ प्यार भरे संवादों से संवार दे
हर रिश्ते से ऊपर भी रिश्ता, औरत ही औरत की फरिश्ता।
बुझते दीपक की लौ बनी वो, पंकज को मटमैला करने वालों की विद्रोह बनी वो।
क्या और कहना सुनना अब बाकी, सोच से ऊंची क्षमता स्त्री की ।
निशी मंजवानी ✍️
