बुज़दिल
बुज़दिल
" क्या बात है श्रवण, बहुत परेशान दिख रहे हो? सब ठीक तो है न ?" उसे भोजन को बस अनिच्छा से कुतरता देखकर अनु ने प्रश्न किया।
" हाँ अनु, सब ठीक है।"
" मुझे लगा था कि बेशक हम जीवनसाथी न बन पाए पर अच्छे मित्र तो हमेशा रहेंगे।" उसने शिकायत की।
" इसमे कोई शक ही नही अनु, हम अब भी अच्छे मित्र हैं। " श्रवण ने उनका मनुहार किया।
" तो फिर बताओ न कि इतने उखड़े हुए क्यों नज़र आ रहे हो ?"
" तुम ये तो जानती ही हो कि मेरे विवाह को कई वर्ष बीत गए "
" हाँ तो ?"
" पर अब भी हम निसन्तान हैं। इस बात को लेकर माँ और दादी जब देखो तब मानसी को ताने देती रहती हैं।"
" किसी डॉक्टर से मिले तुम ?"
" सारे चेकअप करवा लिए, कुछ भी समस्या नही निकली। घर का माहौल बहुत खराब हो गया है। हर वक़्त के ताने, मानसी का रोना... मन बहुत खराब हो जाता है मेरा।"
" क्या तुम यह सोचते हो कि इसमें मानसी की कोई गलती है ?"
" नहीं, ऐसा तो नहीं "
" तो माँ और दादी से कहते क्यों नहीं, कि औरत भी एक इंसान है, कोई बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं।"
" अब तो दादी मेरी दूसरी शादी की बात भी करने लगी हैं। जी चाहता है घर छोड़कर कहीं चला जाऊं।" उसकी बात का जवाब न देकर श्रवण ने आगे कहा।
" तो बच्चा गोद ले लो।"
" पर वह अपना खून तो नहीं होगा।"
" क्यों, तुम्हारे खून में ऐसी कौन सी बात है, जिसका चलना इतना ज़रूरी है ?"
" अरे ! क्या बात कर रही हो ?"
" नहीं बताओ न, तुम्हारे खून में स्पेशल क्या है? कौन से महाराणा प्रताप या शिवाजी तुम्हारे यहाँ पैदा हुए हैं?'
" बेकार की बात मत करो। " अब वह झुँझला गया था।
" तुम्हारे वंश का चलना इतना ज़रूरी क्यों है? एक ऐसा बुज़दिल, जो बेहिसाब मोहब्बत के बावजूद भी घरवालों की मर्जी के खिलाफ अपनी पसंद की लड़की से शादी की हिम्मत नही जुटा पाया,जो अपनी बेगुनाह बीवी के साथ नही खड़ा हो पा रहा। "
वह खामोश रह गया।
" अरे आई वी एफ तकनीक है, और भी कई रास्ते हैं। अगर इस बार तुमने अपनी पत्नी का साथ नहीं दिया तो ईश्वर भी तुम्हे माफ़ नही करेगा।"
कुछ देर वह सर झुकाए सोचता रहा। अनु भी खामोश रही। फिर वह उठ खड़ा हुआ
" चलता हूँ, कोशिश करूँगा की गलत हालात को सही कर सकूँ।"
" ऑल द बेस्ट " अनु सन्तोष के साथ मुस्कुरा दी।
