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लोगों का काम है कहना ( अफसर बिटिया) भाग ( 1 )

यह कहानी है , राधा नाम की एक लड़की की जिसने अभी अभी ट्वेल्थ के एग्जाम दिए हैं , और अपने रिजल्ट आने का वेट कर रही है ।

राधा अपने मम्मी पापा और दादी के साथ रहती है , वह अपने मां-बाप की इकलौती संतान है , जितना अपने घरवालों की लाडली है , उतना ही पढ़ने में होशियार  भी है ।

उसके पापा की एक छोटी सी दुकान है किराने की , उसी से ही घर का खर्चा चलता है , इतनी आमदनी नहीं हो पाती , फिर भी पूरा परिवार खुश है मम्मी ग्रहणी है ।

वैसे तो राधा की दादी बेटा-बेटी में अंतर नहीं करती , और अपनी राधा से बहुत प्यार करती हैं , पर कभी-कभी आसपास की औरतों की बातों में भी  आ जाती हैं ।

राधा का एक सपना है वह पढ़ लिखकर कुछ बन जाए , वह इसी कोशिश में रहती है जहां से भी ज्ञान मिले प्राप्त कर लें ।


कुछ दिन बाद ,,,,,,,,,,,

राधा के पापा -  अपनी पत्नी को बार-बार आवाज़ लगा रहे हैं जल्दी करो जल्दी से तैयार हो जाओ ।

राधा की मम्मी -  अभी से क्या जल्दी है अभी टाइम है ।

आज राधा का रिजल्ट जो आने वाला था , इसलिए दोनों बहुत जल्दी कर रहे थे , उन्हें पता था उनकी बेटी अच्छे नंबरों से पास होगी , राधा की दादी ने तो ना जाने कितने पकवान बना लिए , उन्हें अपनी बेटी पर पूरा विश्वास था  ,जैसे ही रिजल्ट आएगा वह सब अक्षरधाम मंदिर घूमने जाएंगे ।

अचानक ही राधा -  राधा कहते हुए एक लड़की घर में एंटर करती , यह सरिता है जो कि राधा की बेस्ट फ्रेंड है ।


उसे देखते ही राधा की मम्मी कहती  अरे सरिता जरा सास  तो लेले ।

तभी आगांन में दादी आकर पूछतीं  ,औ चिड़िरया क्यों सुबह सुबह चिल्ला रही , कै हो गया जो अपना गला फांड रही हो ।

सरिता  दादी का हाथ पकड़ कर नाचने लगती ।

दादी - ऐ छोरी कै कर रही छोड़ मुझे चक्कर आ रहे ।

राधा की मम्मी - सरिता छोड़ो मां जी को ।

सरिता दादी को छोड़ देती ।

दादी अपने को संभालते हुए , ऐ छोरी यह तू क्या कर रही थी , इस उम्र में क्यों मेरी हड्डी पसली तोड़ने में तुली है ।

राधा के पापा - बेटी क्या बात है जो तू इतना उछल रही ।

सरिता - ( चहकते हुए ) अकंल हमारा रिजल्ट आ गया ।

( क्या सब एक साथ चौकते हुए ) ????

दादी - बता ना क्या आया ?

सरिता - हमारी बिट्टू रानी कहां है  ,? इतना शोरगुल हो गया फिर भी वह दिखाई नहीं दे रही ।

राधा की मम्मी -  आज रिजल्ट आने वाला था ना , इसलिए माता रानी का आशीर्वाद लेने गई है मन्दिर ।

सरिता  - तभी वह नहीं दिखी ।

राधा के पापा - अब तो बताओ बेटा क्या रहा ?

सरिता -  पास हो गई आपकी बिट्टू रानी , और पास  ही नहीं बल्कि पूरे जिले में टॉप किया है उसने ।

यह समाचार सुनते ही सब खुशी से झूम उठे ।

दादी  - सरिता तूने यह बड़ी अच्छी खबर सुनाई , और तेरा क्या रहा ?

सरिता - ( मुस्कुराते हुए  ) दादी आप तो जानती हो , पढ़ने में  कैसी हूं मैं तो बस पास हो गई ।

तब तक राधा भी आ जाती , सब उसे बधाई देते , राधा भी अपने मम्मी पापा और दादी के ले गले लग कर उनका आशीर्वाद लेती ।

धीरे धीरे यह बात भी पूरे मोहल्ले में फैल जाती , और सब  बधाई देने का तांता लग जाता ।

ऐसे ही समय अपने पंख लगा कर निकल गया , पर कहते हैं ना जब अच्छा समय आता है , तब बुरा समय भी अपने साथ अवश्य लाता है ऐसा ही कुछ हुआ ।

चूंकि राधा के पापा की दुकान ज्यादा नहीं चलती थी , बस उस दुकान से घर का खर्चा ही निकल जाता था , तो इतना इनकम का सोर्स नहीं था , फिर भी वह अपनी बच्ची को अच्छी से अच्छी शिक्षा देना चाहते थे ।

राधा का सपना था वह पढ़ लिख कर ऑफिसर बनने का , ऑफिसर बनने के लिए जिन पुस्तकों की आवश्यकता थी , वह बहुत ही महंगी थी , जिसे राधा अफोर्ड  नहीं कर सकती , जो भी सोर्स था  पत्र पत्रिका , समाचार पत्र , या टीवी राजा इन्हीं सब चीजों से पढ़ती थी ।


अब उसका एडमिशन कॉलेज में भी हो गया , और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने लगी ।

एक दिन उसकी दादी आंगन में बैठी हुई थी , तभी घर के दरवाजे पर दस्तक होती है ।

राम राम बुआ जी !!!!!!

राधा के दादी अपना सिर ऊपर करके देखती घर पर कौन आया , अरे बिमला तू आजा बड़े दिनों बाद आई आ बैठ यहां ।

मूढां सरकाते हुए कहती ।


राधा की दादी  - अपनी बहू को आवाज देती ,  बहू बिमला आई  है , उसके लिए कुछ खानपान के लिए लेकर आ जा ।

अंदर से राधा की मम्मी की आवाज आती ला रही हो मां जी ।


दादी - अब सुना विमला कैसी है ?   तू और इतने दिन कहां थी ?

विमला  - मैं ठीक हूं बुआ जी , आप अपनी सुनाओ , सुना है बिटिया पास हो गई तो बधाई देने चली है ।

दादी - हां , मेरी बेटी हीरा है हीरा देखना वह हम सबका एक दिन नाम रोशन करेगी , और वह अपनी राधा के गुणगान गाने लगती ।



शेष अगले अंक में......................

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