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क्या कहा? कुछ नहीं।

  क्या कहा? कुछ नहीं।

बारिश की बूँदें झरमर झरमर धीरे-धीरे एकसाथ गिर रही थीं। प्रकृति खिल उठी। नदी ने धीरे-धीरे बहना शुरू कर दिया। पहाड़ों से मोतियों की माला जैसे झरने नदी से मिलने के लिए उत्सुक होकर गीत गाते, नाचते बह रहे थे। गुलाबके पौधों पर फूल इधर-उधर झूमने लगे। एक फूलकी कली थोड़ी उदास हो गई, तो दूसरी लहराते हुए उसे प्यार से धक्का मारकर बोली,

"अरी... क्यों चुपचाप ख़डी है? नाच नहीं रही?” जवाब में कली और भी उदास हो गई। तभी दूसरी कली उस उदास कली को लपेटकर दूर खींच ले गई। सबके साथ झूलते हुए गीत गाती हुई वह वापस आई और पहले उदास कली को गले लगाते हुए फिर बोली,

“अरी... ए... चल ना, झूम तो ले। देख, आज सब नए-नए साज सजकर कितना झूम रहे हैं। या फिर इस छोटी उम्र में कोई भंवरेका ख्याल आया है!”

यह कहकर वो हंसकर उसे दूर अपने साथ लेके ज़ुलने लगी। उदासी में डूबी कलीने मुस्कुराते हुए एक लंबी साँस लेकर कहा,“कुछ नहीं, बस मैं सोचती हु की हमारा भी जीवन कैसा है! प्रभु ने हमें सिर्फ प्रकृतिकी सुंदरता के लिए ही रचा है।"

"तो क्या हम भाग्यशाली नहीं हैं?”... दूसरी खिलखिलाकर हँसते हुए बोली,

“तू नीचे तो देख, पता चल जाएगा। हमारे भाई-बहन कैसे कुचले पड़े हैं। आखिरकार हमें भी...”यह सुनकर दूसरी थोड़ी उदास हो गई, लेकिन तुरंत हँसकर बोली,

"पगली ! तू सामने देख, किसान कितने खुश हो रहे हैं। और उस तरफ देख, छोटे-छोटे बच्चे कैसे पानीमे खेल रहे हैं। आखिरकार तो वे भी मिट्टी में ही मिल जाने वाले हैं, यह कुदरतका नियम है। वैसे भी हम भगवान के चरणों में जाएँगे या फिर कोई दुल्हन हमें अपने बालों में गूँथ लेगी!

“हाँ, लेकिन आखिरकार तो कचरे में ही जाना है ना? कोई हमें हमेशा थोड़े ही रखेगा।

"रखेगा क्यों नहीं? मेरी माँ तो कहती थी कि अगर कोई प्रेमी युवक हमें किताब में रखकर अपनी प्रेमिका को दे दे, तो वह बहुत संभालकर रखती है।”

“तो चल, हम भी ऐसे युवक का इंतजार करें।”और दोनों सखियाँ दूसरी सखियों के साथ झूमते-झूमते सुंदर गीत गाकर बाग में अपनी खुशबू फैलाने लगीं। एकबेंचपर लड़का लड़की बैठे थे, दोनोके बीच कुछ गहरी बातें चलती थी। दोनो भीगते हुए दिलों के साथ उठ खड़े हुए और मानो उस कलियोंकी खुशबू को पाने के लिए पास आ गए। यह देखकर दोनों कलियाँ कुछ उम्मीद से एक-दूसरे में समा गईं। युवक ने उन कलियोंको तोड़कर युवतीको देते हुए कहा,

“मेरी तरफ से ये पहली भेंट...”युवतीने हर्षित होकर स्वीकार करते हुए कहा,"

“मैं तेरी इस भेंट को जिंदगी भर संभालकर रखूँगी...”यह कहकर उसने दोनों कलियों को चूमा और अपनी पर्स में रख लिया। दोनों कलियाँ अंदर से खिलखिलाकर हँस पड़ीं। युवक ने जैसे कुछ सुना हो, पूछा,“क्या कहा?”

“कुछ नहीं...”और दोनों जोर-जोर से हँस पड़े।
----------------------पूर्ण.

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