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तेरे प्यार को सलाम

( क्लास रुम की सबसे पीछे की लाईन में बेठे हम 5 दोस्त)
"नहीं नहीं यार मेरा पैन (कलम) मत फेंक"...
राजू मुझसे गुज़ारिश के भाव से कहता है
फिर भी मैं राजू के पैन को आगे बैठी लड़कियों के बीच फेंक देता हूं ।
लगभग 1 मिनट बाद
"कौन था
कौन था ये बदतमीज" ?
हाथ में वही पेन लेकर आगे की लाइन में से एक लड़की की आवाज आती है
मैं पीछे की लाइन में अपने दोस्तों के साथ बैठा था
तभी मेरी आगे वाली लाईन में बेठा दीपक पीछे मुड़कर मुझसे कहता है
"वो देख तूने किससे पंगा ले लिया"
मैं सिर को निचे रखें स्कूल बैग पर छुपाते हुए
"अरे यार ये पेन भी इस पर ही गिरना था "।
एक बार फिर जोर से आवाज आती है
"मैं पूछतीं हूँ कौन था वो ?
कविता की आवाज़ सुन पूरी क्लास चुप हो गई थी
"अब कोई बोलता क्यो नहीं" ?
"कविता सिंह चावड़ा" हमारे क्लास की एक "टॉपर"
ओर सभी अध्यापको एवं अध्यपिकाओ की लाडली , कविता स्कूल में अब तक (नवीं तक) सभी क्लासो में टॉप रही हैं
उसने गायकी, चित्र और कविता में भी स्कूल का नाम पूरे जिले में रोशन किया है।
स्कूल में सुबह की प्रार्थना ज्यादातर कविता ही गाती है
यहां तक की नोटिस बोर्ड पर ज्यादातर अच्छे विचार भी कविता खुद ही लिखती है
कहा जाये तो पूरी स्कूल में उसका पॉवर एक टीचर से कम नहीं है"।
हमेशा शांत और अपनी किताब में डूबी रहतीं हैं।
आज मगर पता नहीं उसे क्या हो गया था इतना गुस्सा उसके चेहरे पर आज से पहले कभी नहीं देखा था।
"अरे हुआ क्या है जो इतना चिल्ला रही हो आज?
उसके पास में बैठी प्रिया उससे पूछती है।
क्लास में कविता की सिर्फ दो लडकियों से ही उसकी दोस्ती हैं("प्रिया और पायल")
"यह देख मेरी चुन्नी (दुपट्टा) "
"पूरी स्याही से नीली कर दी"
अपनी सहेली को स्याही से भरी चुन्नी को दिखाते हुए गुस्से से कहती है।
उसी पल राजू खड़े होकर जोर से
"ये वीर !
"इसने ही मेरा पेन तुम पर फेंका था"
राजू पूरे जोश के साथ कहता हैं।
मैं सिर छुपायें सब सुन रहा था।
तभी अचानक गणित वाले सर की कक्षा में दस्तक होती है
"क्या हुआ कविता ?
सर के कविता को इतना पूछते ही हैं कि पूरी कक्षा -
"Good mornig sir" कहतें हुए हम सब (पूरी क्लास) खड़े होते हैं
अब सर का पूरा ध्यान कविता से हट कर पूरी क्लास पर आ जाता हैं ।
"Mornig ok बेठ जाओ"
कह कर सर क्लास के अंदर आते हैं।
सभी अपनी अपनी जगह पर बैठ जाते हैं
कविता पीछे देखते-देखते धीरे-धीरे नीचे बैठती है
"क्या हुआ कविता?
यह पेन ओर ये स्याही कैसे लगीं?
सर कविता से पूछते हैं ।
सर का यह पूछना ही मेरे दिल की धड़कनों को और तेज कर गया था
क्यूंकि गणित वाले सर बहुत बेरहम थे
और खासकर हम पीछे की लाइन वाले लड़कों पर तो उनका गुस्सा कभी भी कहर बनकर टूट पड़ता था।
मैं हाथ जोड़े मन ही मन अपने सभी भगवान को याद कर चुका था
"हे भगवान आज ये कविता
बस आज मेरा नाम ना ले बस"।
"सर वीर ने मेरा पेन कविता पर फेंक दिया था इसीलिए"
राजू फिर से उसी जोशिले अंदाज में कहता हैं ।
"चुप हो जा रे ओए"
मैं दबी जुबान से
सर राजू की बात अनसुना करते हुए राजू को कहतें हैं ।
"हां बेटा तू बोल ?
"क्या हुआ?"
सर कविता को बडे प्यार से पूछते हैं ।
"कुछ भी नहीं सर"
"पता नहीं किसका पेन है ?
मुझे तो यहां पड़ा मिला"।
सोचा की पीछे की लाइन में से किसी का होगा इस लिए
कविता सिर झुका कर कहती है ।
"कौन था वो बतमिज़"
सर शत्रुघ्न सिन्हा के अंदाज में गुस्से के साथ बोलते हैं
"नहीं नहीं सर कोई नहीं था जाने दीजिए"
कविता मुझे देख कर
सर को मनाते हुए कहतीं हैं
"तो ठीक है"
सर कविता से ।
"मुझें लगा ये नालायक वीर तुमको परेशान कर रहा हैं"
सर मेरी तरफ देख कर जोर से कहते हैं ।
"सर वो आज आप गणित में दस नम्बर का टेस्ट(परीक्षा) लेने वाले थे ना?
सर का ध्यान अपनी ओर खीचते हुए कविता कहती है।
"अरे हां
तो फिर ठीक है फिर चलो आज तुम सबका टेस्ट ले ही लेते हैं
साइन थीटा कोस थीटा वाली प्रश्नावली से होगा तुम सब का पेपर
10 सवाल होंगे और
10 नंबर का पेपर होगा
10 नंबर के पेपर में से जिस किसी के भी 7 से कम नंबर आए तो मैं आज उसकी हालत खराब करने वाला हूं"।
पीछे की लाइन में मेरे और मेरे दोस्तों की तरफ देखकर सर जोरों से बोल रहे थे ।
और मेरी हालत अब और ज्यादा खराब हो रही थी क्योंकि मैं हर रोज इन्हीं गणित वाले टीचर से सुबह-सुबह ही मार खाता हूँ ।
"अब क्या होगा"
"भगवान बचा ले" मैं मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रहा था।
"मैं ऑफिस से तुम सब के लिए प्रश्न पेपर लेकर आता हूं तब तक तुम सब अपनी अपनी कॉपिया लेकर तैयार रहना ओर हां सभी अपने स्कूल बैग यहाँ मेरी टेबल के पास रख देना"
कहते हुए सर ऑफिस की तरफ निकल जाते हैं
मैं कविता की तरफ देखता हूं और मन ही मन में कहता हूं "कहां फंसा दिया आज तुने मुझें"
वो अपनी पढ़ाई गुम थी।
कुछ ही देर बाद सर हाथों में प्रश्न पेपर लेकर आते हैं
"चलो पास के कमरे में चलतें हैं
रुम खाली है और वहां पर कोई नहीं है
सभी अपने - अपने पेन और कॉपी ले कर मेरे पीछे पीछे आ जाओ तुम सभी"
सर क्लास से बाहर निकलते हुए ।
"सर यही पर सही रहेगा" पीछे से एक आवाज आती हैं
"कौन बोला" सर तुरन्त पीछे देख कर ।
"सर मैं" कविता मासूमियत से ।
"बेटा पर यहाँ पर ये" सर कविता की तरफ देख कर
कुछ देर रुक कर
"पीछे वाले बदमाश कभी नहीं सुधरेंगें "अब मेरी तरफ देख कर
"सर आप एक काम करो
पीछे वालों को आगे बेठा दो
और
आगे वालों को पीछे" कविता सर को सुझाव देतीं हुई कहतीं हैं ।
"अरे वाह क्या बात है"
"ये हुई न बात "
सर कविता की बात पर खुश हो कर।
"तो फिर ठीक है
अब आप सब अपनी अपनी जगह बदल लो
आगे वाली सभी लडकियों तुम पीछे चली जाओ
और पीछे वाले सब आगे आ कर बेठ जाओ"
सर प्रश्न पेपर देखते हुए कह रहे थे ।
हम सभी जगहों की अदला-बदली करते हैं
मैं आगे से दूसरी लाईन में बेठता हूँ
ताकी सर बार बार मेरी कॉपी ना देखें।
"कोई भी आवाज़ नहीं करेगा"
"प्रश्न पेपर को जोर जोर से नहीं पढ़ेगा।
सर सभी को प्रश्न पेपर देते हुए कहतें हैं
मेरे टेबल पर पेपर रख कर सर मुझसे कहतें हैं
"याद रहे 10 में से कम से कम 7 आने ही चाहिए"
"हम्म्म्म" मैं सिर को हिला कर ।
पेपर का पेहला प्रश्न देखा और मेरा सर दर्द करने लगा।
जेसे जेसे प्रश्न देखता जाता मेरा दर्द बढ़ता ही जाता
कुछ देर बाद सोचा देखूँ तो सही उसको
जिसने मुझे आज ये दर्द दिया है ।
पीछे देखा तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गई
"अरे ये वहां क्या कर रही है"?
मेरे मुह से निकल जाता है
"क्या हुआ" ?मेरी आवाज सुन कर राजू धीरे से मुझसे पूछता है ।
"वो देख मेरी जगह पर"
"कविता बेठी"है ।
राजू कविता को एक नजर देखता है और फिर नजर अंदाज कर देता है
सभी अपने अपने दिमाग के घोड़े परीक्षा में दौड़ा रहे थे
पूरी कक्षा एकदम शांत थी
छत पंखे की आवाज भी बहुत साफ साफ सुनाई दे रही थी ।
कक्षा के बाहर चिड़िया और कौवा की आवाज भी हमें पूरी साफ तरीके से सुनाई दे रही थी
सभी बहुत ध्यान से अपनी परीक्षा दे रहे थे सिवाय मेरे
मुझे उस 10 प्रश्नों वाले पेपर में किसी एक प्रश्न का भी उत्तर नहीं पता था।
कभी दाएं देखता कभी बाय देखता
और इस बार जैसे ही मैंने पीछे कविता की तरफ देखा
कविता ने दोनों पलको को एक साथ उठाकर सीधे मुझे देख लिया
मानो जेसे उसको पता हो की मैं अभी उसकी तरफ देखने वाला हूँ।
झुकी हुई गर्दन से उसने अपनी बडी-बडी आंखों से कुछ पलों के लिए मुझे गौर से देखा।
मुझे लगा की उसको पेन वाली बात याद आ गयी
मेने तुरंत अपनी नज़रो को हटा लिया
ओर अपनी कॉपी में देखने लगा।
कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या लिखूं कॉपी में
"कुछ तो लिख ही लो" पीछे से आवाज़ आती हैं
सभी अपनी परीक्षा को छोड़ पीछे देखते हैं और कानाफूसी शुरू हो जाती है।
मैं भी देखता हूँ
"कौन था ये"?? सर जोर से बोलतें है
सर की आवाज सुन पूरी कक्षा में पूरी तरह से सन्नता छा जाता है।
पता नहीं क्यों लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था मानो कविता ने मुझे ही कहा हो
"कुछ तो लिख ही लो"।
फिर से सभी का ध्यान अपनी - अपनी कॉपी के ऊपर था।
मैंने भी अपना पेन लिया और ऊपर वाले को याद कर कर जितना और जो आ रहा था वह सब लिखने लग गया मुझे यह पता था कि मेरा हर उत्तर सही नहीं है फिर भी मैं अपनी कोशिश करने लगा।
"सिर्फ 5 मिनट बाकी है सभी अपने अपने नाम और रोल नंबर अच्छी तरह से साफ साफ अक्षरों में अपनी कॉपी के ऊपर लिख दे"
सर अपनी हाथ की घड़ी में देख कर कहते हैं ।
सभी ने अपने अपने प्रश्न हल कर चुके थे और एक दूसरे की तरफ इशारों ही इशारों में पूछ रहे थे मानो
"तेरे कितने हुए " या तेरे कितने गलत हुए "
मैंने भी कॉपी में बहुत कुछ लिख दिया था मगर यह यकीन था कि ज्यादातर के उत्तर सही से नहीं लिखा है।
मैं अपना नाम और रोल नंबर चेक करता हूं और एकदम से पीछे देखता हूँ
कविता जो मेरी ही जगह पर बैठी
पेंसिल को अपने दांतो से चबाती हुई मुझे ही देख रही थी जैसे ही मेने उसे पीछे मुडकर देखा।
वो डर गई
पेंसिल मुंह से गिर गई
और निचे अपनी कॉपी में देखने लगी।
मैंने मुंह फेर लिया और आगे देखें लग गया
अब मैं सर को देख रहा था वो एक-एक करके सभी की कॉपियां लेते हुए मेरी तरफ आ रहे हैं।
सर ने मेरी कॉपी को एक झटके में उठा कर आगे निकलते हैं और मैं भी सर निकलते ही पीछे से अपनी जगह पर खड़ा होता हूं।
"कोई अपनी जगह से खड़ा नहीं होगा" सर कॉपी लेते हुए कहते हैं ।
मैं ओर मेरे बहुत से दोस्त जो अपनी अपनी जगह पर खड़े थे और लड़कियों के उठने का इंतजार कर रहे थे वह सभी सर की आवाज सुनकर फिर से अपनी जगह पर बैठ जाते है और सर को देखते हैं ।
सर सभी की कॉपी लेकर सामने टेबल पर रख देते हैं और खुद कुर्सी पर बैठ जाते हैं।
"आज आप सब अपनी-अपनी कॉपियां खुद चेक करोगे"
सर मुस्कुराते हुए हमसे कहतें हैं
"सर.....हम?? पूरी क्लास एक साथ पूछती है कि ।
"हाँ.. किताब में से देख कर ।
सर फिर हस्ते हुए कहतें हैं !
"किताब में से तो उत्तर देख ही सकते हो
या वह भी नहीं कर सकते तुम लोग!
सर फिर मुस्कुराते हुए हम सब की ओर देखकर कहते हैं!
सर की यह बात सुनते ही पूरी कक्षा में सभी मन ही मन बहुत खुश हो गए थे !
"रुको रुको इतना खुश होने की जरूरत नहीं है मैंने आप सब लोगों के लिए एक सरप्राइज रखा है"
सर अपनी जगह से खड़ा होकर फिर हंसते हुए कहते हैं!
"सरप्राइज" ?
सभी आश्चर्य से सर की और देखते हैं!
"हां सरप्राइज....
"और वह सरप्राइज हैं कि सभी लड़कियों की कॉपियां लड़के चेक करेंगे !
और लड़कों की कॉपियां लड़कियां चेक करेगी"!
सर की यह बात सुनता ही सभी एक दूसरे की तरफ देखते हैं कुछ लड़कियां हंस रही थी कुछ लड़के घबरा रहे थे मैं भी घबरा रहा था क्योंकि जो हरकत मैंने आज की थी मुझे ऐसा लगा था कि सभी लड़कियां मुझ पर गुस्सा है या नाराज है
कुछ देर रुक कर सर कविता की और देख कर
(जो मेरी जगह पर बैठी थी)
"बेटा कविता इधर आना मेरे पास" सर कविता को अपने पास बुलाते हैं
कविता मेरे पास से होकर गुजरती है और
मैं ना चाहते हुए भी उसकी तरफ देखने लगा
अचानक मेरी नजर उसके दुपट्टे पर जा गिरी
उसके बाएं कंधे वाले दुपट्टे पर और दुपट्टे के निचले भाग पर कुछ स्याही के धब्बे साफ साफ नजर आ रहे थे
मुझे दिल से बहुत बुरा लग रहा था
क्योंकि मैं खुद पूरे स्कूल में सिर्फ कविता की ही इज्जत करता था हालांकि यह बात और है कि हमने कभी एक दूसरे से बात तक नहीं की कभी सामने भी नहीं देखते थे फिर भी मैं उसकी बहुत इज्जत करता था।
क्योंकि कविता बहुत सीधी और पढ़ाकू लड़की थी।
कभी किसी को कुछ नहीं कहती
वह सिर्फ अपने काम में मस्त रहती
वह हमेशा अपनी पढ़ाई में मस्त रहती!
"यह लो कॉपियां" सर कविता को टेबल पर रखी कॉपियां बताते हुए कहते हैं
"और लड़कों की सारी कॉपियां लड़कियों में बांट दो और लड़कियों की सारी कॉपियां लड़कों में बांट दो ।
"मैंने लड़कियों की और लड़कों की दोनों की कॉपियों को अलग अलग कर दिया है ताकि तुम्हें बांटने में आसानी हो और किसी एक को अपने साथ में ले लो ताकि वह तुम्हारी मदद कर सके
"प्रिया बेटा तू आ जा"
और सर कॉपियां कविता और प्रिया को दे देते हैं।
कविता और प्रिया सभी को क्रम के हिसाब से कॉपिया बांट देती है
(लड़कों की कॉपियां लड़कियों को और लड़कियों की कॉपियां लड़कों को देती हैं)
मैंने देखा कविता और प्रिया सभी को कॉपियां बांट रहीं थीं
पर कविता ने अपने दूसरे हाथ मैं मेरी कॉपी ले रखी थी मुझे अब पूरा यकिन हो चला था कि मेरी कॉपी कविता ही चेक करेगी
और आज मेरा सर के हाथों मेरा बुरा हाल करवाएगी
सभी उत्तर पुस्तक में से कॉपियों में 10 मे से नंबर देते हैं
प्रिया ने मुझे पूजा नाम की एक लड़की की कॉपी दी थी
मैंने उसको 10 में से आठ नंबर दिए
क्योंकि उसके आठ सवाल एक दम सही थे और दो उसने किए नहीं थे इसलिए उसको 10 में से आठ नंबर मैंने दिया
उत्तर पुस्तिका से देखकर।
मैं बार-बार कविता की तरफ देख रहा था
कविता हंसते हुए मेरी कॉपी चेक कर रही थी।
कुछ देर में वह घड़ी भी आ गई जिसका सभी को इंतजार था ।
"हां तो बच्चों सभी ने कॉपियां जांच ली?
सर अपनी हाथ घड़ी में देखकर पूरी कक्षा से पूछते हैं।
"हां सर" सभी एक साथ बोलतें है ।
"तो जिस जिसके भी 7 से कम नंबर आया है या आई है वह खड़े हो जाओ"
हाथ में डंडा लेकर रुबाबदार अंदाज से कहते हैं।
पूरी कक्षा में बहुत से लड़के अपनी जगह पर खड़े होते हैं और कुछ लड़कियां भी अपनी जगह पर खड़ी होती है।
मुझे भी पता नहीं क्यों पूरा यकीन था कि मेरे भी 7 से कम नंबर ही आए होंगे
तो मैं भी बिना किसी की सुने अपने जगह पर खड़ा हो गया।
"अरे ओए" पीछे से एक आवाज आती हैं ।
मैंने इस बार पीछे मुड़कर नहीं देखा क्योंकि
मुझे पता था आवाज कविता की है
मुझे शर्म आ रही थी
मैं कैसे उससे नजरें मिलाऊ
7 से भी कम नंबर जो लाया था
मेरा मन नहीं कर रहा था पीछे उसकी तरफ देखूँ या पीछे बैठी लड़कियों में से किसी की भी तरफ देखूँ
बस मन में सोच लिया था कि थोड़ी मार खाकर और बैठ जाऊंगा ।
"कौन है ?
"पीछे से किस की आवाज आ रही है ?
"अब कोई आवाज नहीं करेगा।
सर सभी को चुप करा कर एक नजर देखते हैं जो खड़े हुए थे उनको।
मैं भी आगे से दूसरी लाइन में खड़ा था
तो सर की नजर जैसे ही मुझ पर आईं और
"अरे आप"
"आप ही का तो इन्तजार था"
सर डंडा लेकर सबसे पहले मेरी तरफ आते हैं।
मैं अपना हाथ आगे करके खड़ा हो जाता हूं
"गणित"
"सिर्फ गणित"
"इसी में फैल होना है"
"पढ़ाई नहीं करनी है इनको"
और सर आते ही मेरे दाएं हाथ पर पहला डंडा मार देते हैं।
"सर... सर
"सर रुको सर" डरी हुई आवाज से कविता अपनी जगह पर खड़ी होकर कहती है।
"अब क्या हुआ"?
सर कविता को कहतें हैं ।
"सर आप इसे क्यों मार रहे हो"
"इसके तो 10 में से 9 नंबर हैं"
"क्या" ??
9 नंबर?
सर बड़ी आश्चर्य से!
"हां सर इसकी कॉपी मैंने खुद चेक की है" ।
कविता अपने मासूमियत भरे चेहरे से सर को कहती है।
"कहां है इसकी कॉपी?
हाथ में डंडा लिए सर कविता के सामने देख कर कहते हैं।
"सर... सभी की कॉपियां अभी तक आपके टेबल पर ही पड़ी है !
"वीर की कॉपी भी वही होगी!
"आप कहो तो मैं लाकर आपको दिखा देती हूं?
चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास लिए कविता सर की आंखों में आंख डालकर कहती है!
मैंने आज तक उसकी आंखों में इतना विश्वास कभी नहीं देखा!
"इसकी कॉपी किसने चेक की थीं ?
एक बार फिर कविता को पूछते हैं।
"सर मैंने ही की है"!
(कुछ देर रुक कर कविता फिर से)
"और इसमें इतना आश्चर्य जैसे क्या बात है
माना की वीर गणित में कमजोर हो सकता है
लेकिन हम सभी को ये भी पता हैं के वीर
हिंदी और विज्ञान में कक्षा में हर बार अच्छे नंबर से पास होता है।
कविता का इतना कहते ही पूरी क्लास मुझे और कविता को देखने लग गई
क्योंकि कविता के जुबान से निकला हर शब्द सत्य होता है अगर उसने कह दिया है तो जरूर मेरे 10 में से 9 नंबर आए ही आए हैं
सर भी इस बात को पूरी तरह मानते हैं की कविता एक सच बोलने वाली हैं ।
"अच्छा तो तुमने चेक की है इसकी कॉपी!
तब तो कोई बात नहीं।
सर के पास कविता के आत्मविश्वास का कोई जवाब नहीं था और ना ही उसके शब्दों का।
"चलो बेठ जाएँ आप दोनों"
हम दोनों को नीचे बैठने का कह कर
सर पीछे मुड़कर दूसरें बच्चों की तरफ चले जाते हैं
तभी कुछ देर में स्कूल की घंटी बज जाती है
और गणित वाले सर चले जाते हैं
जाते-जाते सर
"सभी अपनी अपनी कॉपियां यहां
(सर के टेबल पर रखी कॉपियां)
से ले लो और अपनी गलती सुधारो
देखो आप लोगों ने कौन सा सवाल कहां गलत किया है।
हम सभी अपनी अपनी कॉपी लेकर अपनी - अपनी जगह पर बैठ जाते हैं
मैं पीछे के लाइन में अपनी जगह बैठा हूं
और बैठे-बैठे सिर्फ कविता को देखता हूँ
सभी अपनी अपनी कॉपियां देख रहे थे
सवाल मिला रहे थे
और मैं
मैंने अपनी कॉपी में एक भी सवाल या उत्तर नहीं देखा सिर्फ कॉपी के ऊपर कविता के दिए हुए
10 में से 9 नंबर
और
उसके साइन देख रहा था।
"तूने यार एक रात में पूरी प्रश्नावली याद कर ली?
राजू अचानक मुझसे कहता है।
मैं राजू की तरफ देखता हूं और फिर कविता की देखने लग जाता हूं और कविता इस बात से बेखबर कि कोई उसे पीछे से देख रहा है वह अपना काम (पढ़ाई) कर रही थी।
राजू भी कविता की तरफ देख कर मुझे कहता है
"क्या हुआ कुछ तो बोल
रात को तू ने पढ़ाई की थी या?
"हम्म्म्म"
मैं राजू की तरफ देख कर
और अपनी कॉपी जिस पर कविता ने 10 में से 9 नंबर दिए थे उसको चुपके से अपने बैग में छुपा लेता हूं।
राजू लगभग 10 मिनट तक मेरे कान के पास बक-बक कर रहा था मैं उसकी बातों से बेखबर सिर्फ कविता को देख रहा था लगभग 10या15 मिनट बाद
कविता मुंह में पेन दबाए चोर नजर से पीछे देखती है
और उसकी नजर सीधे मेरी नजर से मिलती है
मैं दूसरे ही पल अपनी नजर नीचे कर देता हूं
कुछ देर नीचे देखने के बाद
मैं जैसे ही कविता की तरफ देखता हूं जो पहले से मुझे ही देख रही थी
इस बार कविता अपने नजर चुरा लेती है।

टिप्पणी/समीक्षा


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