रचना के विवरण हेतु पुनः पीछे जाएँ रिपोर्ट टिप्पणी/समीक्षा

दहेज— एक हास्य कहानी


बात कुछ दशक पहले की है,जब चक्रवर्ती बंगले की जगमगाहट देखते ही बन रही थी ।हो भी क्यों ना? उनकी इकलौती बेटी की शादी जो थी! । वह भी उसके मनपसंद लड़के के साथ " _श्रिजिता संग मनीष राव_ " । 

श्रिजिता की शादी में चक्रवर्ती जी ने, जो बंगाल के छोटे से गांव मीरपुर के जमींदार थे,कोई कसर नहीं छोड़ी। न खर्च करने में,ना उसकी कीमत को बारातियों को बताने में। 

मनीष राव जो एक हाज़िर जवाब व्यापारी का लड़का था।चक्रवर्ती साहब मनीष के पिता को आवाज देते हुए बोले " _क्यों राव साहब खाने में कोई कसर तो नहीं रही? मैंने खाने में 50 लाख लगा दिए।_ "

"_हां वह तो दिख रहा है।"_ चक्रवर्ती साहब आगे बोले "_पान खाओ राव साहब को वह भी मैंने 21 तरह के बनाए हैं।चक्रवर्ती साहब मैंने जो सोफा दिया है वह 30 लाख का है, फ्रिज कूलर एसी 40 लाख खर्च किए और बर्तन, गहने, कपड़े में 50 लाख! साथ में एक नौकर भी दूंगा"_ ।

इतने में राव साहब ठहाके मार के हंसने लगे " _बस इतना ही लड़की की जीवन निर्वाह के लिए दोगे? सोफा,फ्रिज,कूलर, एवं बर्तन की जो आप कीमत बता रहे हैं उनकी उम्र ही इतनी साल है सोफा टूट जाएगा,फ्रिज खराब हो जाएगा,वही बात गहनों की, लड़का गहने व्यापार में लगा देगा!_ "


राव साहब आगे हंसते हुए हंसते पांच चबाते बोले "बात नौकर की वह भी बूढ़ा हो जाएगा, जो खाना खाया है वह मिट्टी हो जाएगा हा हा" राव साहब आगे बोले, " दो तो ऐसी चीज जो घटे नहीं,निरंतर बढ़ती रहे तो मैं मानू। "

राव साहब की यह बात सुनकर घराती और बाराती में खलबली मच गई। कुछ की हंसी छूट रही थी चक्रवर्ती साहब को देखकर फिर भी वह बोले " _मैं आधी जमीन देता हूं"_  

राव साहब बोले " _वह शहर के रास्ता बनाने में कट जाएगी या कोई छीन भी सकता है।_

"अपना बंगला देता हूं" राव साहब बोले "_वह रखरखाव में खराब हो जाएगा"_

 आगे राव साहब बोले " _भाई चक्रवर्ती साहब आप अपने अच्छे संस्कार दीजिए लड़की को, जो आपका और मेरा मान बढाए है! यह चीज घटती नहीं है_ ।" 

चक्रवर्ती साहब के साथ-साथ सभी के चेहरे खिल उठे हंसी के ठहाकों के साथ।


सार- *कभी-कभी इंसान ज्यादा दिखावे में हंसी का पात्र बन जाता है।*

लेखिका- सीमा नेगी

टिप्पणी/समीक्षा


आपकी रेटिंग

blank-star-rating

लेफ़्ट मेन्यु