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बढ़िया लड़का

                              बढ़िया लड़का 

                              आनंद चौधरी 


मोबाइल की रिंगटोन बजी।

"आलू ले ले, कांदा ले ले, मूली गोभी टिंडा ले ले।"

एस.बी.आई. की संदेश ब्रांच के आगे सी.डी.एम. के पास ड्यूटी पर तैनात गार्ड कलेक्टर यादव ने अपनी हथेली पर की खैनी मुंह में डाली। खैनी मुंह में एडजस्ट करके अपने पैंट की जेब से मोबाइल निकाली। और कॉल रिसीव करके मोबाइल अपने दाहिने कान से सटाया।

दूसरी तरफ से उसके साले संदीप का बेहद हड़बड़ाया सा स्वर उभरा-"ह.. हैलो, हैलो जीजा जी प्रणाम।"

"अरे संदीप जी, प्रणाम।"-प्रत्युत्तर में कलेक्टर यादव बोला-"आप एतना हड़बड़ाये हुए काहे हैं? कउनो हड़बड़ की गोली खा लिए हैं का? गांव-घर के सब समाचार ठीक तो है?"

संदीप ने बताया-"सब ठीके है जीजा जी, वो क्या है कि हमारी शादी सेट हो गई है।"

"अरे वाह।"-कलेक्टर यादव खुश हो उठा-"इ त बहुते खुशी की बात है। इसमें एतना हड़बड़ाने की का जरूरत है?"

संदीप ने वजह बयान की-"बात अइसा है न जीजा जी कि परिवार में सब लोग का विचार है कि छोटकी बहिनिया रिंकिया का भी शादी एक ही साथ कर दिया जाये। उससे इ फायदा होगा कि हमलोग ओकर बियाह के एक्स्ट्रा खर्चा खोराकी से बचेंगे।"

कलेक्टर यादव ने समर्थन में सिर हिलाया-"हां तो उनका भी बियहवा कर दीजिए न। कमी का चीज का है?"

"जीजाजी एगो लड़का के कमी है। शादी करने के लिए आखिर एगो बढ़िया लड़का चाहिए न। बढ़िया लड़का मिलेगा तब न शादी होगा। आपके निगाह में हित-नाता में कउनो बढ़िया लड़का है का?"

कलेक्टर यादव ने दिमाग पर जोर डाल कर याद करते हुए बताया-"बढ़िया लड़का .... हां एगो बढ़िया लड़का है मेरी निगाह में.. बहुत काबिल और कमाऊ लड़का है। रिंकी को वो बहुत खुश रखेगा।"

संदीप खुश हो उठा-"अरे वाह जीजा जी, एतना जल्दी आप लड़का भी खोज दिये। आप सचमुच हमलोगों के लिए संकटमोचन हैं। बियाह में हमरा जो अंगुठीया मिलेगा न जीजाजी, उ हम खुशी से आपको देंगे। वैसे जीजाजी, उ लड़का करता का है?"

जवाब में कलेक्टर यादव ने एक नजर सीडीएम मशीन की तरफ घुमाई, और एक कस्टमर को पैसा निकालते हुए देख कर बोला-"लड़का साहब लोग की तरह शान से कुर्सी लगा कर दिन भर एसी में बैठा रहता है। उसकी निगरानी में दिन भर अथाह पैसा का लेन-देन होते रहता है।"

सुन कर संदीप खुशी के मारे थरथरा उठा-"अरे वाह जीजाजी, आपने तो कमाल कर दिया। हेतना बढ़िया आ कमाउ लड़का खोज दिए आप .. अच्छा इ बताइए कि उ लड़कवा दहेज केतना लेगा?"

कलेक्टर यादव ने एक बार रिंकी के सुंदर से चेहरे को याद किया, और फिर कुछ सोचते हुए बोला-"साले साहब, उसके तरफ से दहेज का कउनो डिमांड नही है। आप जेतना दहेज देंगे, जउची देंगे, उ खुशी-खुशी रख लेगा। और अगर आप एको रूपिया कुछ नही भी देंगे तो वो अपना पैसा से आपके दरवाजे पर बाजा-गाजा सहित बारात लेकर आएगा और आपकी बहन को ब्याह कर डोली में, सॉरी थार में बिठा कर अपने घर ले जाएगा।"

संदीप अब पहली बरसात के मेंढक की तरह खुश हो उठा-"अरे वाह जीजा जी, आज के दुनिया में भी एतना सुंदर विचार के लड़का मौजूद है। इ हेतना बढ़िया लड़का कहां का है? कउन गांव का है?"

कलेक्टर यादव ने बताया-"उ लड़का हमारे ही आदर्श गांव का है।"

"बहुत बढ़िया जीजा जी।"-अब संदीप की खुशी फिक्स डिपॉजिट के पैसे की तरह सात साल की बजाय एक सेकेंड में ही दुगनी हो गई-"ये तो और बढ़िया बात है जीजाजी। हमार दुनो बहिन एक गांव में रहेगी, तो एक दूसरे की सुख-दुख का ख्याल रखेगी। वैसे आपके गांव में वो लड़का है कौन?"

जवाब में कलेक्टर यादव धीरे से बोला–“हम हैं।"

जवाब सुन कर उधर से तुरंत कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया गया।

कॉल डिस्कनेक्ट होते-होते कलेक्टर यादव को संदीप के मधुर स्वर में दो-तीन शब्द सुनाई पड़ा।

"तोहार बहिन के ...।"

"हैलो हैलो...।"-कलेक्टर यादव ने आवाज लगाई, पर कॉल डिस्कनेक्ट हो चुका था।

मोबाइल जेब में वापस रख कर कलेक्टर यादव खुद से बड़बड़ाते हुए मासूम लहजे में बुदबुदाया-"हम कुछो गलत बोल दिए का?"

                                                             ★ समाप्त

 

 

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