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बनारस

मेरी रगो में तू, लहू सा बहता है।
ए बनारस तू मेरे जहन मे हरपल रहता है।
मिलना है मुझे एक बार तुझसे,
कि....
मिलना है मुझे एक बार तुझसे,
ए बनारस तुुुझसे इश्क करना तो बनता है।


निशा 

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