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उषा का विवाह

उषा तुम्हारा जादू
मन को मोहने वाला है
जैसे कोई नई नव वधू
सज रही हो अपने वर के लिए
आसमान अगुवाई कर रहा है
कहीं पंछी उड़ रहे हैं
कही पेड़ झूम रहे हैं 
सूरज की लालिमा
अभी  नई नई है
पूरी कायनात सूरज के
 स्वागत की तैयारी में है
लो सूरज धरा पर उतर आया
 और विवाह संपन्न हुआ।

अनीता चेची,मौलिक रचना 


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