राजनारायण बोहरे का जन्म अशोकनगर मध्यप्रदेश में हुआ , बोहरे ने एम् ए हिंदी साहित्य , पत्रकरिता और लॉ में स्नातक डिग्री ली है, अब तक राज बोहरे के चार कहानी संग्रह इज़्ज़त-आबरू , गोस्टा, हादसा और मेरी प्रिय कथाएं प्रकाशित हुए है, उन्हें मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मलेन का वागीश्वरी पुरस्कार...More
राजनारायण बोहरे का जन्म अशोकनगर मध्यप्रदेश में हुआ , बोहरे ने एम् ए हिंदी साहित्य , पत्रकरिता और लॉ में स्नातक डिग्री ली है, अब तक राज बोहरे के चार कहानी संग्रह इज़्ज़त-आबरू , गोस्टा, हादसा और मेरी प्रिय कथाएं प्रकाशित हुए है, उन्हें मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मलेन का वागीश्वरी पुरस्कार और साहित्य अकादेमी मध्य प्रेदश का सुभद्रा कुमारी chohan पुरस्कार मिला है,
Book Summary
‘‘ ये जंगल हमारा मायका है और ये पेड़ हमारे नातेदार। अगर ये पेड़ कट गये तो न हमारे घर बचेंगे न खेत। सब मिट जायेगा। पेड़ हैं तो हमारे यहां हरियाली है। हम तुम्हे इन पेड़ों से हाथ भी नही लगाने देंगे। खबरदार जो किसी ने कुल्हाड़ी चलाई। ’’ उन सब बाहर के आदमियों को डांटते हुए गौरा देवी ने अपने गांव की महिलाओं से कहा ‘‘ क्यों बहनो हमने ठीक कहा? ’’
‘‘ हां ठीक कहा ’’ सारी महिलायें गुस्से से कांप रही थीं।